घर के मंदिर में दीपक जलाना केवल रोशनी करने की क्रिया नहीं है। यह अपने इष्ट के सामने श्रद्धा, शुद्धता और भीतर के अंधकार को हटाने का संकल्प है। इसलिए बहुत से भक्त पूछते हैं कि पूजा करते समय दीपक किस तरफ रखना चाहिए, दीपक इष्ट के सामने हो या अपनी दाईं ओर, और पूजा में दीपक की लौ किस भाव से रखनी चाहिए।

पूजा करते समय दीपक किस तरफ रखना चाहिए?
घर की सामान्य पूजा में दीपक को देवस्थान के आगे, स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर रखना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि आप मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर पूजा कर रहे हैं, तो दीपक को अपनी दाईं ओर या देवस्थान के आगे-दक्षिण भाग में रखा जा सकता है। यदि मंदिर छोटा है, तो दीपक इष्ट के ठीक सामने भी रखा जा सकता है, बस लौ सुरक्षित रहे और आपका ध्यान प्रभु चरणों में बना रहे।
दिशा का नियम श्रद्धा को सहारा देने के लिए है; पूजा का मूल नियम शुद्ध भाव है। दीपक ऐसी जगह न रखें जहां वह परदे, फूल-माला, कपड़े, लकड़ी या कागज के बहुत पास हो। दीपक स्थिर रहे, हिले नहीं, और पूजा करते समय बार-बार हाथ लगाकर उसे ठीक न करना पड़े।
दीपक इष्ट के दाईं ओर रखें या अपनी दाईं ओर?
घरेलू पूजा में सरल नियम यह रखें: भक्त सामने बैठा है, तो दीपक भक्त की दाईं ओर या देवस्थान के सामने-दक्षिण भाग में रहे। कई घरों में परंपरा के अनुसार दीपक ठीक सामने भी रखा जाता है। यदि आपके घर में गुरु-परंपरा या कुल-परंपरा से कोई निश्चित विधि चली आ रही है, तो उसी को आदर दें। नए साधक के लिए सबसे सरल मार्ग है कि दीपक स्वच्छ, स्थिर और ध्यान में सहायक स्थान पर रखा जाए।
माता लक्ष्मी की पूजा में दीपक रखने की सूक्ष्म बात अलग से समझनी हो, तो लक्ष्मी जी के सामने दीपक किस तरफ रखें लेख पढ़ें। मुख्य द्वार के दीपक का नियम अलग है; उसके लिए घर के बाहर दीया किस तरफ रखना चाहिए वाला मार्गदर्शन उपयोगी रहेगा।
घी का दीपक या तेल का दीपक?
पूजा में घी का दीपक सात्त्विकता, शांति और मधुर भाव के लिए सुंदर माना जाता है। यदि प्रतिदिन घी संभव न हो, तो श्रद्धा से तिल या सरसों के तेल का दीपक भी जलाया जा सकता है। विशेष पूजन, शुक्रवार, पूर्णिमा, अमावस्या या संध्या आरती में घी का दीपक अधिक मंगलकारी माना जाता है। इस विषय को विस्तार से समझने के लिए घी का दीपक जलाने के फायदे पढ़ सकते हैं।
पूजा में दीपक रखने की सरल विधि
- सबसे पहले घर के मंदिर, चौकी और पूजा स्थान को साफ करें।
- दीपक को धोकर या पोंछकर स्वच्छ करें; बासी तेल या जली हुई पुरानी बाती न रखें।
- रुई की बाती स्थिर रखें और दीपक को मंदिर के आगे सुरक्षित जगह पर रखें।
- दीपक जलाते समय भगवान श्रीराम, अपने इष्ट या गुरु चरणों का स्मरण करें।
- दीपक जलाकर तुरंत भागें नहीं; कुछ क्षण शांत बैठकर नाम-स्मरण करें।
घर के मंदिर की सफाई और पूजा स्थान की शुद्धि को समझना हो तो घर के मंदिर की सफाई कब और कैसे करें लेख भी उपयोगी है। स्वच्छ स्थान, सुगंध, जल और दीपक मिलकर पूजा को जीवंत बनाते हैं।
सुबह और शाम के दीपक में क्या अंतर है?
सुबह का दीपक दिन की शुरुआत में सद्बुद्धि और प्रभु-स्मरण का भाव जगाता है। शाम का दीपक दिनभर की थकान के बाद घर को फिर से भक्ति में लौटाता है। यदि आप समय को ठीक से समझना चाहते हैं, तो सुबह दीपक जलाने का सही समय और शाम को दीपक जलाने का सही समय पढ़ें।
दीपक रखते समय इन भूलों से बचें
- दीपक को बहुत नीचे, पैर लगने वाली जगह या जूते-चप्पल के पास न रखें।
- दीपक को ऐसी जगह न रखें जहां लौ से कपड़े, पर्दे या सजावट को खतरा हो।
- टूटे, गंदे या बहुत पुराने दीपक में पूजा का दीप न जलाएं।
- पूजा करते समय दीपक को केवल दिखावे के लिए न जलाएं; मन में नम्रता रखें।
- दीपक बुझने के बाद बत्ती और शेष सामग्री को सम्मान से साफ करें।
दीपक के साथ कौन सा भाव रखें?
बाबा श्री राज महाजन जी की दृष्टि में साधना का बल बाहरी वस्तु से अधिक भीतरी श्रद्धा में है। दीपक जलाते समय मन में यह भाव रखें: “हे प्रभु, मेरे घर, मन और कर्मों में आपका प्रकाश बना रहे। मेरा अहंकार घटे, सद्बुद्धि बढ़े और जीवन सेवा, भक्ति और राम नाम से जुड़ा रहे।”
यदि आप दीपक के बाद कुछ मिनट नियमित साधना जोड़ना चाहते हैं, तो राम नाम बैंक में राम नाम लेखन का संकल्प लें। जिन भक्तों को रामचरितमानस की चौपाइयों से साधना और उपाय की दिशा चाहिए, वे सिद्ध चौपाइयां ईबुक भी देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पूजा में दीपक अपनी दाईं ओर रखना चाहिए?
सामान्य गृह पूजा में भक्त दीपक को अपनी दाईं ओर या देवस्थान के सामने-दक्षिण भाग में रख सकते हैं। यदि मंदिर छोटा है, तो दीपक इष्ट के सामने सुरक्षित स्थान पर भी रखा जा सकता है।
दीपक की लौ किस ओर होनी चाहिए?
लौ सुरक्षित और स्थिर रहे, यह सबसे जरूरी है। पूजा में लौ ऐसी हो कि वह ध्यान में बाधा न डाले और इष्ट के सामने प्रकाश का भाव बनाए रखे।
क्या रोज पूजा में दीपक जलाना जरूरी है?
रोज दीपक जलाना सुंदर साधना है। यदि रोज संभव न हो, तो कम से कम संध्या, विशेष व्रत, अमावस्या, पूर्णिमा या पारिवारिक पूजा के समय श्रद्धा से दीपक अवश्य जलाएं।
निष्कर्ष
पूजा करते समय दीपक किस तरफ रखना चाहिए, इसका सरल उत्तर है: दीपक को स्वच्छ, स्थिर और सुरक्षित जगह पर, भक्त की दाईं ओर या देवस्थान के आगे रखें। पर दिशा से बड़ा नियम है भाव। दीपक की लौ तब ही पूजा को पूर्ण करती है जब मन में श्रद्धा, नम्रता, प्रभु-स्मरण और सेवा का संकल्प हो।
सियापति श्रीरामचंद्र जी की जय।




