घर के मंदिर में दीपक जलाना केवल पूजा का एक नियम नहीं, बल्कि प्रकाश को अपने जीवन में आमंत्रित करने का भाव है। जब भक्त माता लक्ष्मी के सामने दीपक रखते हैं, तो मन में सबसे पहले यही प्रश्न आता है कि लक्ष्मी जी के सामने दीपक किस तरफ रखें, कौन सा दीपक जलाएं और किस भावना से पूजा करें। गुरुजी की दृष्टि में दीपक की लौ बाहरी समृद्धि से पहले भीतर की शुद्धि, संतोष और सद्बुद्धि को जगाती है।

लक्ष्मी जी के सामने दीपक किस तरफ रखें?
सरल नियम यह है कि माता लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक स्वच्छ, स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखें। यदि आप पूजा में सामने बैठकर माता के दर्शन कर रहे हैं, तो दीपक को अपनी दाईं ओर या देवस्थान के आगे-दक्षिण भाग में रखना शुभ माना जाता है। यदि मंदिर छोटा है, तो दीपक माता के ठीक सामने भी रखा जा सकता है, बस लौ सुरक्षित रहे और फूल, वस्त्र या परदे से दूर रहे।
दिशा से भी बड़ा नियम है भाव। दीपक ऐसी जगह रखें जहां उसे देखकर मन स्वतः शांत हो और ध्यान माता के चरणों में टिके। दीपक को कभी जल्दबाजी में, जूते-चप्पल, धूल या गंदे स्थान के पास न रखें। लक्ष्मी पूजन में स्वच्छता, सुगंध, प्रकाश और कृतज्ञता चारों साथ चलें तो पूजा का भाव गहरा हो जाता है।
घी का दीपक या तेल का दीपक?
लक्ष्मी जी के सामने शुद्ध घी का दीपक विशेष शुभ माना जाता है, क्योंकि घी सात्त्विकता, मधुरता और शांति का भाव देता है। यदि प्रतिदिन घी संभव न हो, तो श्रद्धा से तिल या सरसों के तेल का दीपक भी जलाया जा सकता है। शुक्रवार, पूर्णिमा, अमावस्या, दीपावली या विशेष लक्ष्मी पूजन में घी का दीपक अवश्य सुंदर माना गया है। घी के दीपक के व्यापक महत्व को समझने के लिए आप घी का दीपक जलाने के फायदे वाला लेख भी पढ़ सकते हैं।
सरल लक्ष्मी दीपक विधि
- सबसे पहले घर के मंदिर, चौकी और आसपास की जगह को साफ करें। मंदिर की शुद्धि के लिए घर के मंदिर की सफाई कब और कैसे करें लेख उपयोगी रहेगा।
- मिट्टी, पीतल या तांबे का साफ दीपक लें और उसमें शुद्ध घी डालें।
- रुई की साफ बाती रखें। बाती स्थिर हो, बहुत लंबी या बिखरी हुई न हो।
- माता लक्ष्मी के सामने दीपक रखें और मन में कृतज्ञता का भाव लाएं।
- दीपक जलाते समय शांत भाव से कहें: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
- दीपक जलाकर तुरंत उठें नहीं। कुछ क्षण मौन बैठें और नाम-स्मरण करें।
लौ किस दिशा में रहे?
घर के मंदिर में दीपक की लौ ऐसी रहे कि पूजा करते समय वह आपके ध्यान में बाधा न बने और सुरक्षित भी रहे। सामान्य पूजा में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना शुभ माना गया है। यदि मुख्य द्वार पर दीपक रखना हो, तो उसका नियम अलग है; उसके लिए घर के बाहर दीया किस तरफ रखना चाहिए लेख पढ़ें। सुबह और शाम के समय को अलग समझना हो तो सुबह दीपक जलाने का सही समय और शाम को दीपक जलाने का सही समय भी देखें।
5 बातों की छोटी चेकलिस्ट
- दीपक हमेशा साफ और स्थिर स्थान पर रखें।
- माता लक्ष्मी के सामने दीपक रखते समय मन में लोभ नहीं, कृतज्ञता रखें।
- दीपक के पास कपड़ा, कागज या परदा न हो।
- पूजा स्थान में सुगंध, जल, फूल और स्वच्छता का ध्यान रखें।
- दीपक के बाद कुछ क्षण राम नाम, लक्ष्मी मंत्र या अपने इष्ट का स्मरण करें।
दीपक के साथ कौन सा संकल्प करें?
दीपक जलाते समय मन में यह संकल्प रखें: “हे माता, मेरे घर में धर्म, श्रम, सद्बुद्धि और संतोष का प्रकाश बना रहे। जो धन आए, वह शुभ कर्म और सेवा में लगे।” जब धन को धर्म से जोड़ा जाता है, तभी लक्ष्मी कृपा स्थिर होती है। यही भाव साधना को व्यापार नहीं बनने देता, बल्कि पूजा को जीवन की दिशा बना देता है।
यदि आप रोज दीपक के बाद कुछ मिनट नाम-स्मरण जोड़ना चाहते हैं, तो राम नाम बैंक में राम नाम लेखन का संकल्प साधना को स्थिर करता है। जिन भक्तों को चौपाइयों के माध्यम से उपाय और साधना की दिशा चाहिए, वे सिद्ध चौपाइयां ईबुक भी देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या लक्ष्मी जी के सामने दीपक दाईं तरफ रखना चाहिए?
यदि आप माता के सामने बैठकर पूजा कर रहे हैं, तो दीपक को अपनी दाईं ओर या देवस्थान के आगे सुरक्षित स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। जगह कम हो तो माता के ठीक सामने भी रख सकते हैं।
लक्ष्मी जी के लिए घी का दीपक कब जलाएं?
शुक्रवार, संध्या समय, पूर्णिमा, अमावस्या और दीपावली पर घी का दीपक विशेष मंगलकारी माना जाता है। प्रतिदिन संध्या दीपक भी घर में शुभ भाव जगाता है।
क्या केवल दीपक जलाने से लक्ष्मी कृपा मिलती है?
दीपक साधना का सुंदर आरंभ है। उसके साथ स्वच्छता, सच्चा श्रम, विनम्रता, दान, धर्म और नाम-स्मरण जुड़ जाएं तो लक्ष्मी कृपा का भाव घर में स्थिर होता है।
निष्कर्ष
लक्ष्मी जी के सामने दीपक किस तरफ रखें, इसका उत्तर केवल दिशा में सीमित नहीं है। दीपक माता के सामने, भक्त की दाईं ओर या देवस्थान के सुरक्षित आगे भाग में रखें; पर सबसे बड़ा नियम है शुद्ध मन, स्वच्छ स्थान और कृतज्ञता। दीपक की लौ छोटी हो सकती है, पर श्रद्धा से जले तो वह घर में धर्म, संतोष और मंगल का प्रकाश फैला देती है।
सियापति श्रीरामचंद्र जी की जय।




